बड़े केडवाल में बदली बस्तर की तस्वीर: जहां कभी कलेक्टर को बंधक बनाकर रखा था, वहीं शान से फहराया तिरंगा
सुकमा :- कभी नक्सलियों के खौफ और दहशत का गवाह रहा सुकमा जिले का बड़ा केडवाल गांव आज बदलते बस्तर की नई तस्वीर पेश कर रहा है। जिस गांव के स्कूल में वर्ष 2012 में तत्कालीन सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा था, उसी गांव में अब 80वां स्वतंत्रता दिवस आजादी और लोकतंत्र की पहचान तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहराया

दरअसल, 21 अप्रैल 2012 को तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन केरलापाल क्षेत्र के मांझीपारा गांव में ग्राम सुराज अभियान के तहत ग्रामीणों की बैठक ले रहे थे। इसी दौरान नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया था। इस दौरान कलेक्टर के दो सुरक्षाकर्मियों की नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
अपहरण के बाद कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को करीब 12 दिनों तक नक्सलियों के कब्जे में रखा गया। ग्रामीणों के मुताबिक, इनमें करीब 6 से 7 दिन उन्हें बड़े केडवाल गांव के स्कूल में रखा गया था। उस दौरान पूरे गांव को नक्सलियों ने घेर रखा था और ग्रामीणों में भय का माहौल था।
सरकार और मध्यस्थों के प्रयासों के बाद आखिरकार 3 मई 2012 को एलेक्स पॉल मेनन को सुरक्षित रिहा कर दिया गया। यह घटना सुकमा के इतिहास में नक्सल हिंसा की भयावह तस्वीर के रूप में दर्ज हुई।
लेकिन आज वही बस्तर बदल रहा है।
नक्सलवाद से मुक्त सुकमा में पहली बार जिले के 50 गांवों में तिरंगा फहराया गया। इन गांवों में बड़ा केडवाल भी शामिल है। जहां कभी नक्सलियों का कब्जा और खौफ था, वहीं आज ग्रामीणों ने पूरे गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
बड़े केडवाल में लहराता तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने बस्तर को भय से विश्वास, बंदूक से विकास और नक्सली दहशत से लोकतंत्र की ओर आगे बढ़ाया है।
कभी जहां नक्सलियों का खौफ था, आज वहीं तिरंगे की शान है।
बड़े केडवाल की यह तस्वीर सच में बदलते बस्तर की नई कहानी बयां कर रही है।
