मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों के लिए जारी की गई विशेष कृषि एडवाइजरी

सुकमा में बारिश की चेतावनी, किसानों को मौसम ऐप से जुड़ने की अपील 

सुकमा :- किसानों की खुशहाली और खरीफ फसलों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने एक सराहनीय एवं संवेदनशील पहल की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय), जगदलपुर से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के मद्देनजर, प्रशासन ने जिले के अन्नदाताओं के लिए व्यापक कृषि सलाह जारी की है। आगामी 15 से 19 जुलाई 2026 के दौरान सुकमा जिले में हल्की बारिश होने, घने बादल छाए रहने तथा हवा की गति 3.0 से 6.0 किलोमीटर प्रति घंटा होने की संभावना जताई गई है। इस बदलते मौसम में किसानों की मेहनत बेकार न जाए, इसके लिए जिला प्रशासन मुस्तैदी से काम कर रहा है।

प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में धान, मक्का, अरहर और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों के लिए उन्नत तकनीकों और सही बीजोपचार की समझाइश दी गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे उन्नत किस्म के बीजों का चुनाव कर 15 जुलाई तक धान की सीधी बुआई पूरी कर लें और अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में लेही पद्धति का उपयोग करें। मक्के की खेती करने वाले किसानों को फसलों को इल्लियों से बचाने के लिए खेतों में ‘टी’ आकार के बांस लगाने की अभिनव सलाह दी गई है, ताकि पक्षी उन पर बैठकर कीटों का प्राकृतिक रूप से भक्षण कर सकें। इसके अलावा, दलहनी-तिलहनी फसलों के बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरकों से उपचारित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन की सुरक्षा के लिए भी जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। मौसम की चेतावनी को देखते हुए पशुपालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने पशुओं को गीले व पानी भरे स्थानों पर न चराएं और उन्हें सुरक्षित बाड़ों में ही रखें। वर्षाजनित रोगों से बचाव के लिए पशुओं को कृमि नाशक दवा देने तथा खुरपका-मुंहपका जैसे घातक रोगों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कराने की अपील की गई है। इसके अलावा, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार, हरा चारा और खनिज मिश्रण देने की जरूरी सलाह भी दी गई है।

जिला प्रशासन की इस सजगता का उद्देश्य तकनीक और सही जानकारी के माध्यम से किसानों की लागत को कम करना और उनकी आय को बढ़ाना है। बदलते मौसम के इस दौर में फसलों को नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्षा के समय खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या नींदानाशक का छिड़काव न करें। इसके साथ ही, आम नागरिकों और किसान भाइयों से विशेष अनुरोध किया गया है कि वे तुरंत ‘मौसम सी जी ऐप’ (मेघदूत) पर अपना पंजीकरण कराएं, ताकि पल-पल बदलते मौसम का सटीक पूर्वानुमान और कृषि से जुड़ी हर जरूरी सलाह सीधे उनके मोबाइल पर मिल सके। प्रशासन की इस जनहितैषी पहल की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है।

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