दृष्टिबाधा को मात देकर सुकमा की बेटी सोढ़ी बीडे ने रचा सफलता का स्वर्णिम इतिहास
सुकमा की एक और दिव्यांग बेटी सोढ़ी बीडे ने किया अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन ।
12वीं बोर्ड परीक्षा में 71.66% अंक प्राप्त कर बढ़ाया जिले का गौरव।
सुकमा :- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से सफलता, संघर्ष और आत्मविश्वास की एक और अत्यंत प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो कोई भी बाधा मंज़िल की राह नहीं रोक सकती।
पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सुकमा की दृष्टिबाधित छात्रा कुमारी सोढ़ी बीडे ने कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 71.66 प्रतिशत अंक अर्जित कर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे सुकमा जिले और आकार आवासीय संस्था का नाम गर्व से ऊँचा कर दिया है।
वर्ष 2017 से आकार आवासीय संस्था से जुड़ी कुमारी सोढ़ी ने कक्षा चौथी से ही विशेष शिक्षकों के मार्गदर्शन में ब्रेल लिपि के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करनी शुरू की। उनकी सीखने की ललक, समर्पण और आत्मविश्वास ने उनके शैक्षणिक जीवन को एक मजबूत दिशा प्रदान की। संस्था में रहकर उन्होंने न केवल शिक्षा प्राप्त की, बल्कि संगीत के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा को निखारा।
वर्तमान में वे इंदिरा गांधी संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से 6 वर्षीय संगीत डिप्लोमा भी कर रही हैं, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और प्रतिभा का सुंदर उदाहरण है।
कक्षा 9वीं से 12वीं तक पीएम श्री स्वामी आत्मानंद विद्यालय, सुकमा में अध्ययन करते हुए उन्होंने निरंतर परिश्रम, अनुशासन और अदम्य साहस के साथ यह उपलब्धि हासिल की। विद्यालय के प्राचार्य, विशेष शिक्षक एवं आकार आवासीय संस्था के शिक्षकों ने उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समर्पित सहयोग और मार्गदर्शन देकर उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुमारी सोढ़ी बीडे ने अपनी दृष्टिबाधा को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी शक्ति में बदलते हुए यह सिद्ध किया कि सफलता शारीरिक सीमाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से तय होती है।
उनकी यह शानदार उपलब्धि न केवल सुकमा जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
जिला प्रशासन, विद्यालय परिवार एवं आकार आवासीय संस्था ने उनकी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ दी हैं।
कुमारी सोढ़ी बीडे की यह सफलता हमें सिखाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि आत्मविश्वास और मेहनत साथ हो, तो सफलता निश्चित है।
