सुकमा में लाल मिट्टी डंपिंग पर बड़ा सवाल
सुकमा :- जिले में इन दिनों प्राकृतिक जल स्रोतों और तालाबों के आसपास भारी मात्रा में लाल मिट्टी डंपिंग का मामला सामने आ रहा है। जल स्रोतों को पाटकर वहां लाल मिट्टी डाली जा रही है, जिससे पर्यावरण और जल संरक्षण पर खतरा मंडरा रहा है।
नियमों के मुताबिक किसी भी प्राकृतिक जल स्रोत, तालाब या नाले में मिट्टी डालकर भराव करना गलत माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। जो तालाब कभी पानी से लबालब भरे रहते थे, वे अब लाल मिट्टी से पट चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी, तो यही लाल मिट्टी बहकर नदी-नालों और जल स्रोतों में मिल सकती है, जिससे पानी प्रदूषित होने का खतरा बढ़ जाएगा। इसका असर सिर्फ पर्यावरण पर ही नहीं बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जल संकट पर भी पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस “लाल जहर” के बदले सुकमा को क्या मिल रहा है?
क्या विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को खत्म किया जा रहा है?
अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
